क्रांतदर्शी महात्मा बसवेश्वर
Publication details: भारतीय विचार साधना प्रकाशन 2024 पुणेDescription: 260ppISBN:- 9788197037405
| Cover image | Item type | Current library | Home library | Collection | Shelving location | Call number | Materials specified | Vol info | URL | Copy number | Status | Notes | Date due | Barcode | Item holds | Item hold queue priority | Course reserves | |
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| Books | MKSSS s K.B. Joshi Institute of Information Technology Library | MCA | Available (not for issue) | 2982 | KBJP-BK-2982 |
12वीं सदी के एक महान भारतीय दार्शनिक, समाज सुधारक और कवि थे, जिन्होंने कर्नाटक में लिंगायत संप्रदाय की नींव रखी। उन्होंने जातिवाद, छुआछूत और अंधविश्वास को चुनौती दी, 'कायाकवे कैलास' (श्रम ही पूजा है) का संदेश दिया और 'अनुभव मंटप' के माध्यम से लोकतंत्र व समानता की स्थापना की।
महात्मा बसवेश्वर के मुख्य क्रांतिकारी विचार और योगदान:
समाज सुधार और समानता: उन्होंने जाति, लिंग और सामाजिक स्थिति के भेदभाव के बिना सभी को समान अधिकार दिए। उन्होंने महिला शिक्षा और सशक्तिकरण का समर्थन किया।
लिंगायत संप्रदाय की स्थापना: उन्होंने वीरशैव (लिंगायत) आंदोलन के माध्यम से शिव को एकमात्र देवता के रूप में पूजने और निराकार ईश्वर की अवधारणा को बढ़ावा दिया।
अनुभव मंटप (लोक संसद): उन्होंने विश्व की पहली संसद या "अनुभव मंटप" की स्थापना की, जहाँ निम्न वर्ग और महिलाओं सहित सभी को चर्चा में भाग लेने की स्वतंत्रता थी।
श्रम की गरिमा (कायकवे कैलास): उन्होंने प्रतिपादित किया कि प्रत्येक व्यक्ति को अपना भरण-पोषण करने के लिए ईमानदारी से काम (कायक) करना चाहिए और कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता।
वचन साहित्य: उन्होंने आम जनता की भाषा कन्नड़ में 'वचन' नामक दार्शनिक कविताएँ रचीं, जो ज्ञान और भक्ति का अनूठा मिश्रण हैं।
वे न केवल एक संत थे, बल्कि एक क्रांतिकारी विचारक थे, जिन्होंने एक न्यायसंगत और समतामूलक समाज के लिए संघर्ष किया। उनके सम्मान में, भारत सरकार ने 2003 में संसद में उनकी प्रतिमा स्थापित की।
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