सावरकर विचारदर्शन
Publication details: भारतीय विचार साधना प्रकाशन 1983 पुणे Description: 342ppISBN:- 9789391558048
| Cover image | Item type | Current library | Home library | Collection | Shelving location | Call number | Materials specified | Vol info | URL | Copy number | Status | Notes | Date due | Barcode | Item holds | Item hold queue priority | Course reserves | |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| Books | MKSSS s K.B. Joshi Institute of Information Technology Library | MCA | Available (not for issue) | 2956 | KBJP-BK-2956 |
हिंदुत्व की अवधारणा: सावरकर के अनुसार, हिंदुत्व केवल धर्म नहीं, बल्कि एक संस्कृति और राष्ट्रवाद का आधार है। इसमें सभी भारतीय मूल के धर्म शामिल हैं, जो पूरे भारतीय उपमहाद्वीप को एक 'हिंदू राष्ट्र' के रूप में देखते हैं।
राष्ट्रवाद और सुरक्षा: सावरकर के विचारों में सशक्त राष्ट्र के लिए सैन्यीकरण और आधुनिक औद्योगिक तकनीक का महत्व निहित है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण: वे अंधविश्वास के खिलाफ थे और देश की प्रगति के लिए तर्कसंगत (rational) सोच पर जोर देते थे।
अखंड भारत: उनका मानना था कि भारत को भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से अखंड होना चाहिए।
डॉ. अरविंद गोडबोले द्वारा लिखित मराठी पुस्तक "सावरकर विचार दर्शन" (1983) स्वातंत्र्यवीर सावरकर के राजनीतिक, सामाजिक और राष्ट्रवादी विचारों का गहन विश्लेषण करती है। यह पुस्तक सावरकर की हिंदुत्व, अखंड भारत, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और राष्ट्र की सुरक्षा संबंधी विचारधाराओं को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
There are no comments on this title.