000 03657 a2200157 4500
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020 _a9788195236978
100 _aवाडेकर शि.
_9216429
245 _aभारत एकातमता स्तोत्र सचित्र दर्शन
260 _bभारतीय विचार साधना प्रकाशन
_c2021
_aपुणे
300 _a135PP.
520 _aभारत की भौगोलिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक एकता को दर्शाने वाला 33 श्लोकों का एक स्तुतिगान है। इसमें पवित्र नदियाँ, पर्वत, महापुरुषों, राष्ट्रभक्तों, और संतों का स्मरण किया गया है, जो राष्ट्र की सांस्कृतिक अखंडता को सूत्रबद्ध करते हैं। यह स्तोत्र भारतीय संस्कृति, दार्शनिकों और राजाओं को नमन करते हुए राष्ट्रीय चेतना जागृत करता है। एकात्मता स्तोत्र का मुख्य विवरण (सचित्र अवधारणा): ॥ ॐ सच्चिदानन्दरूपाय नमोऽस्तु परमात्मने ॥ - स्तोत्र की शुरुआत ईश्वर के ज्योतिर्मय स्वरूप और विश्व कल्याण की कामना के साथ होती है। पवित्र भारतभूमि: इसमें भारत की नदियों (गंगा, यमुना, गोदावरी, आदि) और पर्वतों को नमन किया गया है। ऐतिहासिक और पौराणिक महापुरुष: भगवान राम, कृष्ण, भीम, अर्जुन, दधीचि, और भावी संतों को स्मरण किया गया है जो भारत की पहचान हैं। वीरांगनाएँ: अरुंधति, सावित्री, जानकी (सीता), द्रौपदी, मीरा, और दुर्गावती जैसी मातृ शक्तियों का वंदन। वैज्ञानिक और विचारक: चरक, भास्करचार्य, वराहमिहिर जैसे मनीषियों को याद किया गया है। आधुनिक राष्ट्रभक्त: रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, और विभिन्न संतों का उल्लेख जो 'अखंड भारत' की भावना को प्रेरित करते हैं। यह स्तोत्र सचित्रात्मक रूप में (जैसे हरिश्चंद्र बर्थवाल की पुस्तक) में इन महानुभावों के चित्रों के साथ उपलब्ध है, जो युवाओं में राष्ट्रीय गौरव की भावना जगाता है।
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